हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। देश के भावी कर्णधारों के नैतिक उत्थान में जुटा शांतिकुंज का भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ का दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। इस शिविर में दिल्ली, राजस्थान, मप्र, उप्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा सहित देश के 20 राज्यों के 300 से अधिक जिला व प्रांतीय समन्वयकों ने भागीदारी की। संगोष्ठी में विद्यार्थियों में नैतिक उत्थान से लेकर उनके चहुंमुखी विकास की विभिन्न योजनाओं पर विचार विमर्श हुआ। इस अवसर पर प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि विद्यार्थीकाल से ही उनमें नैतिक उत्थान के बीज रोपे जायें। यही विद्यार्थी आगे चलकर परिवार, समाज व राष्ट्र के विकास में योगदान देंगे। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में संस्कृतिनिष्ठ युवाओं की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्र ने भारतीय संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृति भारतीय संस्कृति है। इसमें समस्त समस्याओं का समाधान निहित है। श्री एचपी सिंह ने परीक्षा की वित्तीय नियम एवं समिति गठन की रीति, नीति पर जानकारी दी। इस अवसर पर डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने दिल्ली, उप्र, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मप्र आदि राज्यों के प्रांतीय संयोजकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए स्मृति चिह्न भेंट किया। भासंज्ञाप के समन्वयक श्री प्रदीप दीक्षित ने बताया कि संगोष्ठी में क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान निकाले गये, तो वहीं विद्यार्थियों के लिए संस्कृति मंडल बनाने एवं उनमें सृजनात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित किये जाने पर बल दिया गया। उन्होंने बताया कि आगामी शैक्षणिक सत्र में भासंज्ञाप की परीक्षा अक्टूबर व नवंबर में कराई जायेगी। इस वर्ष करीब पाँच लाख शिक्षक व गायत्री परिवार प्रतिनिधि देश भर के विद्यालयों से संपर्क कर विद्यार्थियों में नैतिक उत्थान पर विविध कार्यक्रम आयोजित करायेंगे। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को जन्म दिवस मनाना, सद्वाक्य लेखन व पोष्टर प्रतियोगिता, नशा उन्मूलन आदि गतिविधियों में प्रेरित किया जायेगा। इस अवसर पर श्री एस के श्रीवास्तव, श्री शंकरभाई पटेल, श्री रमाकांत अमाटे, श्री एस आर चौधरी, श्री शंकरलाल भावरकर, श्री गंभीरसिंह फर्सवाण, श्री राजपाल शर्मा सहित अनेक प्रांतीय संयोजक उपस्थित रहे। शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि शांतिकुंज परिवार ने पुलवामा में शहीद हुए जवानों को मौन श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर शांतिकुंज के अंतेवासी कार्यकर्त्ताओं के अलावा विभिन्न राज्यों के आये गायत्री साधक उपस्थित रहे। वहीं शहीद जवानों की आत्मा की शांति व सद्गति के लिए वैदिक मंत्रों के साथ विशेष यज्ञाहुतियाँ दी गयी।
(रजत चौहान) हरिद्वार। देश के भावी कर्णधारों के नैतिक उत्थान में जुटा शांतिकुंज का भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ का दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। इस शिविर में दिल्ली, राजस्थान, मप्र, उप्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा सहित देश के 20 राज्यों के 300 से अधिक जिला व प्रांतीय समन्वयकों ने भागीदारी की। संगोष्ठी में विद्यार्थियों में नैतिक उत्थान से लेकर उनके चहुंमुखी विकास की विभिन्न योजनाओं पर विचार विमर्श हुआ। इस अवसर पर प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि विद्यार्थीकाल से ही उनमें नैतिक उत्थान के बीज रोपे जायें। यही विद्यार्थी आगे चलकर परिवार, समाज व राष्ट्र के विकास में योगदान देंगे। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में संस्कृतिनिष्ठ युवाओं की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्र ने भारतीय संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृति भारतीय संस्कृति है। इसमें समस्त समस्याओं का समाधान निहित है। श्री एचपी सिंह ने परीक्षा की वित्तीय नियम एवं समिति गठन की रीति, नीति पर जानकारी दी। इस अवसर पर डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने दिल्ली, उप्र, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मप्र आदि राज्यों के प्रांतीय संयोजकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए स्मृति चिह्न भेंट किया। भासंज्ञाप के समन्वयक श्री प्रदीप दीक्षित ने बताया कि संगोष्ठी में क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान निकाले गये, तो वहीं विद्यार्थियों के लिए संस्कृति मंडल बनाने एवं उनमें सृजनात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित किये जाने पर बल दिया गया। उन्होंने बताया कि आगामी शैक्षणिक सत्र में भासंज्ञाप की परीक्षा अक्टूबर व नवंबर में कराई जायेगी। इस वर्ष करीब पाँच लाख शिक्षक व गायत्री परिवार प्रतिनिधि देश भर के विद्यालयों से संपर्क कर विद्यार्थियों में नैतिक उत्थान पर विविध कार्यक्रम आयोजित करायेंगे। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को जन्म दिवस मनाना, सद्वाक्य लेखन व पोष्टर प्रतियोगिता, नशा उन्मूलन आदि गतिविधियों में प्रेरित किया जायेगा। इस अवसर पर श्री एस के श्रीवास्तव, श्री शंकरभाई पटेल, श्री रमाकांत अमाटे, श्री एस आर चौधरी, श्री शंकरलाल भावरकर, श्री गंभीरसिंह फर्सवाण, श्री राजपाल शर्मा सहित अनेक प्रांतीय संयोजक उपस्थित रहे। शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि शांतिकुंज परिवार ने पुलवामा में शहीद हुए जवानों को मौन श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर शांतिकुंज के अंतेवासी कार्यकर्त्ताओं के अलावा विभिन्न राज्यों के आये गायत्री साधक उपस्थित रहे। वहीं शहीद जवानों की आत्मा की शांति व सद्गति के लिए वैदिक मंत्रों के साथ विशेष यज्ञाहुतियाँ दी गयी।



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