हरिद्वार की गूंज (24*7)
(इमरान देशभक्त ब्यूरो) रुड़की। विश्व प्रशिद्ध पिरान कलियर दरगाह साबिर पाक से अजमेर शरीफ के लिए छडि़यों का जहत्था रवाना हुआ। जत्थे को लेकर जायरीन लगभग एक माह की पदयात्रा करते हुए अजमेर शरीफ पहुंचेंगे। कलियर से छड़ी मुबारक जत्थे के साथ जाने की ये परम्परा सेंकडो साल पुरानी है। कलियर शरीफ के अलावा देश के अलग-अलग स्थानों से भी छड़ी मुबारक का ये जत्था रवाना होता है।सभी जत्थे देश के कोने कोने से आकर दिल्ली में एक बड़े काफले के रूप में पैदल अजमेर के लिए निकलते हैं। एक माह का सफर तय करके ये जायरीन अजमेर शरीफ पहुँचकर खवाजा गरीब नवाज की बारगाह में खिराज-ऐ-अकीदत पेश करेंगे। पिरान कलियर से अजमेर शरीफ के लिए छड़ी मुबारक के रवाना हुए जत्थे में पिरान कलियर स्थित जलाली चौक, रफाई चौक, मदार चौक, बाणवा चौक व दरगाह इमाम साहब से तमाम मस्त मलंग संयुक्त रूप से पदयात्रा का ये काफिला लेकर निकलते हैं।एक माह का पैदल सफर तय कर ये जायरीन अजमेर पहुंचते हैं। अगले माह अप्रैल में ख्वाजा गरीब नवाज का उर्स शुरू हो जाएगा। उर्स शुरू होने से पूर्व छडियों का ये जत्था अजमेर पहुँचता है। यहां पहुँचने पर दरगाह ख्वाजा गरीब नवाज के गद्दी नशीन सय्यद खुशतर चिश्ती की ओर से जत्थे का भव्य स्वागत किया जाता है, उसके बाद तमाम मस्त मलंग गरीब नवाज की बारगाह में खिराज-ऐ-अकीदत पेश करते हैं। चादर पोशी, फूल पोशी कर देश की तरक्की शांति में अमनों-अमान की दुआ मांगते हैं। छड़ी मुबारक लेकर जाने की ये परम्परा सैकडों वर्षों से चली आ रही है। सैंकड़ो वर्ष पूर्व हजरत ख्वाजा गरीब नवाज के उत्तराधिकारी हजरत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी रह0 अले. ने ये परम्परा शुरू की थी। आप हजरत ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स से पूर्व झंण्डा लेकर दिल्ली से जत्थे के रूप में निकले थे तथा पदयात्रा कर अजमेर पहुँचे। उन्होंने ही ख्वाजा गरीब नवाज के रोजे पर झण्डा पेशकर उर्स का आगाज किया था। तब से ये परम्परा इसी तरह चली आ रही है।आज भी देश के कोने कोने से मस्त-मलंग झण्ड़ा छड़ी मुबारक लेकर दिल्ली पहुंचते हैं।और दिल्ली से तमाम मस्त-मलंग मिलकर जत्था बनाकर अजमेर के लिए पदयात्रा पर निकलते हैं। एक माह का पैदल सफर तय करके अजमेर पहुँच कर रोजा ऐ गरीब नवाज पर झंण्ड़ा मुबारक पेश करते हैं। इसी के साथ हजरत ख्वाजा गरीब नवाजा के उर्स आगाज हो जाता है।
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