हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। एक भेंट वार्ता में डॉ आशीष मिश्रा ने कहा कि आयुर्वेद के महान आचार्यों ने सभी वर्गों के मनुष्यों को चेतावनी दी है कि यदि वे अपने स्वास्थ्य को स्थिर रखते हुये स्वास्थ्य रक्षा करना चाहते हैं तो प्रयत्न पूर्वक वीर्य रक्षा करें, वीर्य एक विधाता की अनोखी भेंट है जिसे बाजार में नहीं खरीदा जा सकता, वीर्य के अपव्यय के कारण मनुष्य दरिद्र हो जाता है तथा प्रकृति भी उसके विपरीत हो जाती है, उसका आरोग्य लुट जाता है, तथा आयु भी कम हो जाती है, वीर्य ऐसी पूंजी है जो ना दो दान में मिल सकता है ना ही उधार मिल सकता है, इसके कम होने पर परिणाम स्वरूप कई रोग उतपन्न हो जाते हैं आँखें अंदर को धँस जाती है गाल पिचक जाते हैं शरीर रोगी की तरह जर्जर हो जाता है जोड़ो में दर्द होना शुरू हो जाता है अचानक आँखों के सामने अँधेरा सा छाने लगता है, सिनेमा व गंदी पुस्तकों से स्वयं तथा बच्चों को दूर रखे मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ सम्पर्क करने हेतु करें।
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