हरिद्वार की गूंज
(दिलशाद अली) लक्सर। बसेडी खादर मे ईद-उल-अजहा की नमाज ईदगाह में सुबह आठ बजे हाफिज शमशाद द्वारा अदा कराई गई। ईदगाह मे मखयाली सिधडू सेठपर बहादरपुर पीपली लक्सर गांव आदि के हजारों लोगों ने नमाज अदा की। नमाज के बाद दुआ कराई गई। जिसमे देश मे अमन सलामती रहे और आपस में भाई चारा कायम रहे। इस मौके पर सैकड़ों लोगों ने दुआ के लिए हाथ उठाएं। पूरे देश व दुनिया में अमन शकून रहे। बूढ़े और बच्चो सभी ने हाथ उठाकर दुआएं की। वही हाफिज शामशाद ने बयान करते हुए लोगों को समझाया कुरान और हदीस में अल्लाह ने जन्नत और दोजख के बारे में बताया कि जो बे नमाजी है या बुरे काम करता है। वह नर्क में जाएगा और जो दुनिया में रहकर अच्छे काम करता है नमाज पढ़ता है अल्लाह के सामने रहता है। अल्लाह उसको मरने के बाद जन्नत अता फरमाएगा। इसलिए हम सबको चाहिए दुनिया में रहकर अच्छे काम करें और बुराई से दूर रहे। उन्होने कहा कि इस त्यौहार को रमजान के पवित्र महीने की समाप्ति के लगभग 70 दिनों बाद मनाया जाता है। हजरत इब्राहिम द्वारा अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तत्पर हो जाने की याद में इस त्यौहार को मनाया जाता है। इस्लाम के विश्वास के मुताबिक अल्लाह हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेना चाहते थे। और इसीलिए उन्होंने उनसे अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने के लिए कहा। हजरत इब्राहिम को लगा कि कुर्बानी देते समय उनकी भावनाएं आड़े आ सकती हैं। इसलिए उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली। जब उन्होंने पट्टी खोली तो देखा कि मक्का के करीब मीना पर्वत की उस बलि वेदी पर उनका बेटा नहीं बल्कि दुंबा था। और उनका बेटा उनके सामने खड़ा था। दुनिया भर के मुसलमान इस अवसर पर अल्लाह में अपनी आस्था दिखाने के लिए जानवरों की कुर्बानी देते हैं। कुर्बानी के बाद बकरे के गोश्त को चार हिस्सों में बांटा जाता है। जिसके तीन हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए निकाल दिया जाता है जबकि चौथे हिस्से का इस्तेमाल परिवार और रिश्तेदारों के भोजन के लिए किया जाता है।
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