हरिद्वार की गूंज
(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। हमने कुछ आगंवाडी कार्यकृत्रियो की समस्याओ के बारे मे जानना चाहा तो हमे आगनवाड़ी मे मानदेय पर काम करने वाली कुछ महिलो ने अपने दर्द से उस दर्द से जिसका इलाज सरकारे करने को तैयार नही है, जबकि आंगन वाडियो से छोटे बच्चो को पढाने के अतिरिक्त बी एल ओ डयूटी, सरकार द्वारा कराये सरवे चुनाव डयूटी, पोलियो डयूटी सभी जरूरी कार्य आंगनवाडी कार्यकृत्रियां ही कर रही है, लेकिन फिर भी भारत मे कितनी बिडम्बना है, कि आंगनवाडी जो की लगभग 40 वर्षों से चल रही है, उनकी सैलरी केवल 6000/- मतलब 10 साल में 1500 हजार बढ़ा मतलब एक साल मे केवल 150/- के हिसाब से बढ़ा,इन सरकारों को शर्म नहीं आती ये एक बार विधायक या सांसद बन गए तो जीवन भर पेंसन मिलती हैं, और यहाँ आंगनवाडी बहन को retirment में ठेंगा। जब इन लोगो की सैलरी बढ़ानी हो तो कोई विरोध नहीं बजट में भी कोई दिक्कत नहीं।लेकिन आंगनवाड़ी बहनों के लिए बजट ही नहीं है।और तो और हमारी विभाग की मंत्री जो की महिला है, मेंनका गाँधी जी वो कितनी बेशर्म है, कि कहती है,की आंगनवाड़ी में कोई काम नहीं है, ये लोग सत्ता में आकर गर्रा जाते है, इनको इस बार हराना है।मोदी जी देश को डिज़िटल इंडिया बनाने की बात करते है , क्या ऐसे ही डिजिटल इंडिया बनेगा, मतलब 6000/- रुपये में बच्चे पालो, घर चलाओ, मोदी जी के एक बार का एक टाइम का खाने का बिल होगा 6000/- रूपये और हमे कहते है कि 6000/- में अपना घर चलाओ।देखते जाओ मोदी जी हम बहनो के कारण हारेंगे, इनको इस बार हरा के रहंगे।और पुरे देश की आंगनवाड़ी बहने, संगठन के लोग एक साथ आंदोलान करो, हम इस सरकार को हिला के रख देंगे।नारी में बहुत शक्ति होती है, इनको एहसास कराना ही पड़ेगा। आज हमारी या आंगनवाड़ी बहने दिल्ली की मोदी सरकार को घेर रही है, सब लोग मिलकर लडे तो ही हमे हमारा हक मिलेगा।
Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours